आवारा मैं फिरता हूँ, शहर की गलियों में
मैं तन्हा भटकता हूँ, महकती फिज़ाओं में
कोई आया है मिलने, जगा आस वेरानो में,
क्यों मिलते मुझको, बस पुराने अफसानों में
मेरी आवारगी मचलती है
किसी ने एक ज़ंजीर बांधी है
कशमकश आज जीने की है
और उसने ज़िन्दगी मांगी है
वोह कोई अनजान चेहरा है
जो हर पलक पे दीखता है
क्या इन आंखों का धोका है
जो वोह साथ ही चलता है
आवारा मैं फिरता हूँ, शहर की गलियों में
मैं तन्हा भटकता हूँ, महकती फिज़ाओं में
कोई आया है मिलने, जगा आस वेरानो में,
क्यों मिलते मुझको, बस पुराने अफसानों में
मेरी आवारगी हैरान सी है
वोह क्यों मिलने से डरता है
मेरी सांसों का एक मेला है
वोह हर दम छुपता रहता है
वोह पहचाना सा चेहरा है
जो मुझसे अब दूर रहता है
यह आंखों का इन्तीज़र है
वोह अलग राह पकड़ता है
आवारा मैं फिरता हूँ, शहर की गलियों में
मैं तन्हा भटकता हूँ, महकती फिज़ाओं में
कोई आया है मिलने, जगा आस वेरानो में,
क्यों मिलते मुझको, बस पुराने अफसानों में
मेरी आवारगी आज रुसवा है
यह आज मुझसे ही खफा है
कोई पुराना इससे बीछड़ता है
आज एक नया इससे मिलता है
इसकी यहाँ कौन सुनाता है
यह दिल अब किसको बुलाता है
गुलशन आज फिर से महकता है
इसका तो यह आखिरी दम है
आवारा मैं फिरता हूँ, शहर की गलियों में
मैं तन्हा भटकता हूँ, महकती फिज़ाओं में
कोई आया है मिलने, जगा आस वेरानो में,
क्यों मिलते मुझको, बस पुराने अफसानों में
कहीं दिल आवारा रहता है
कहीं उनसे रुसवा मिलता है
आपनी तो आवारगी हैरान है
यह किसी और पे मरता है
अरसे बाद मर-गया यह है
पर फिर भी याद आता है
इसकी आवारगी सुलगती है
आवारगी की रूह भटकती है
आवारा मैं फिरता हूँ, शहर की गलियों में
मैं तन्हा भटकता हूँ, महकती फिज़ाओं में
कोई आया है मिलने, जगा आस वेरानो में,
क्यों मिलते मुझको, बस पुराने अफसानों में
मैं तन्हा भटकता हूँ, महकती फिज़ाओं में
कोई आया है मिलने, जगा आस वेरानो में,
क्यों मिलते मुझको, बस पुराने अफसानों में
मेरी आवारगी मचलती है
किसी ने एक ज़ंजीर बांधी है
कशमकश आज जीने की है
और उसने ज़िन्दगी मांगी है
वोह कोई अनजान चेहरा है
जो हर पलक पे दीखता है
क्या इन आंखों का धोका है
जो वोह साथ ही चलता है
आवारा मैं फिरता हूँ, शहर की गलियों में
मैं तन्हा भटकता हूँ, महकती फिज़ाओं में
कोई आया है मिलने, जगा आस वेरानो में,
क्यों मिलते मुझको, बस पुराने अफसानों में
मेरी आवारगी हैरान सी है
वोह क्यों मिलने से डरता है
मेरी सांसों का एक मेला है
वोह हर दम छुपता रहता है
वोह पहचाना सा चेहरा है
जो मुझसे अब दूर रहता है
यह आंखों का इन्तीज़र है
वोह अलग राह पकड़ता है
आवारा मैं फिरता हूँ, शहर की गलियों में
मैं तन्हा भटकता हूँ, महकती फिज़ाओं में
कोई आया है मिलने, जगा आस वेरानो में,
क्यों मिलते मुझको, बस पुराने अफसानों में
मेरी आवारगी आज रुसवा है
यह आज मुझसे ही खफा है
कोई पुराना इससे बीछड़ता है
आज एक नया इससे मिलता है
इसकी यहाँ कौन सुनाता है
यह दिल अब किसको बुलाता है
गुलशन आज फिर से महकता है
इसका तो यह आखिरी दम है
आवारा मैं फिरता हूँ, शहर की गलियों में
मैं तन्हा भटकता हूँ, महकती फिज़ाओं में
कोई आया है मिलने, जगा आस वेरानो में,
क्यों मिलते मुझको, बस पुराने अफसानों में
कहीं दिल आवारा रहता है
कहीं उनसे रुसवा मिलता है
आपनी तो आवारगी हैरान है
यह किसी और पे मरता है
अरसे बाद मर-गया यह है
पर फिर भी याद आता है
इसकी आवारगी सुलगती है
आवारगी की रूह भटकती है
आवारा मैं फिरता हूँ, शहर की गलियों में
मैं तन्हा भटकता हूँ, महकती फिज़ाओं में
कोई आया है मिलने, जगा आस वेरानो में,
क्यों मिलते मुझको, बस पुराने अफसानों में
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