Monday, July 30, 2018

तुमसे मिलके भी

तुमसे मिलके भी, हाल-ए-दिल ब्यान कर न सके
कभी दूर से देखते रहे, कभी साथ आहें भरते रहे

है ये कैसी अजब कश्मक्श दिल में मेरे अये दोस्त
तुझे नज़र से निहारते रहे, लबों से कुछ कह न सके

रोज़ उठाते हैं सोच कर की आज तुझसे करेंगे ब्यान
न जाने फिर क्यों हर रात यही सोच लेकर सोते रहे

हैं रंग बेतहाशा इस दुनिया मैं मगर न जाने क्यों हम
हर रंगरेज़ के पास जाकर बस तेरा ही रंग तलाशते रहे

न देखा है मैंने आज तक, कोई तेरे जैसे ए हमदम मेरे
और अपने हातों से तुझे छूने से भी हम घबराते रहे

कैसे छू लेते हम तुझे, तू ही बता ए हमसफ़र मेरे
लोग इलज़ाम देते कि हातों से तुझे मैला करते गए