तुमसे मिलके भी, हाल-ए-दिल ब्यान कर न सके
कभी दूर से देखते रहे, कभी साथ आहें भरते रहे
है ये कैसी अजब कश्मक्श दिल में मेरे अये दोस्त
तुझे नज़र से निहारते रहे, लबों से कुछ कह न सके
रोज़ उठाते हैं सोच कर की आज तुझसे करेंगे ब्यान
न जाने फिर क्यों हर रात यही सोच लेकर सोते रहे
हैं रंग बेतहाशा इस दुनिया मैं मगर न जाने क्यों हम
हर रंगरेज़ के पास जाकर बस तेरा ही रंग तलाशते रहे
न देखा है मैंने आज तक, कोई तेरे जैसे ए हमदम मेरे
और अपने हातों से तुझे छूने से भी हम घबराते रहे
कैसे छू लेते हम तुझे, तू ही बता ए हमसफ़र मेरे
लोग इलज़ाम देते कि हातों से तुझे मैला करते गए
कभी दूर से देखते रहे, कभी साथ आहें भरते रहे
है ये कैसी अजब कश्मक्श दिल में मेरे अये दोस्त
तुझे नज़र से निहारते रहे, लबों से कुछ कह न सके
रोज़ उठाते हैं सोच कर की आज तुझसे करेंगे ब्यान
न जाने फिर क्यों हर रात यही सोच लेकर सोते रहे
हैं रंग बेतहाशा इस दुनिया मैं मगर न जाने क्यों हम
हर रंगरेज़ के पास जाकर बस तेरा ही रंग तलाशते रहे
न देखा है मैंने आज तक, कोई तेरे जैसे ए हमदम मेरे
और अपने हातों से तुझे छूने से भी हम घबराते रहे
कैसे छू लेते हम तुझे, तू ही बता ए हमसफ़र मेरे
लोग इलज़ाम देते कि हातों से तुझे मैला करते गए
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