राह तकते हैं उनकी, पर वोह कहीं दिखते नहीं
अपने दरवाज़े पे मिलने कभी आये वो नहीं
बीत गया लम्हा कल ही उनके मिलने का यहीं
इम्तिहान इंतज़ार का इससे ज्यादा कोई लेता नहीं
अगर आयें तो कहना अब उनसे ऐ ज़माने तुम्ही
आज उनके तस्सवुर में बइठे यहाँ हम ही नहीं
यह कह कर दिल-ऐ-बर्बाद को मिलता चैन कहीं
उनसे खफा होकर तो मिलती मुझे सांसें नहीं
हैफ! किससे कहें हम दिल-इ-तमन्ना या रब,
आज यहाँ हम मरतें हैं और उन्हें फिक्र्र नहीं
अपने दरवाज़े पे मिलने कभी आये वो नहीं
बीत गया लम्हा कल ही उनके मिलने का यहीं
इम्तिहान इंतज़ार का इससे ज्यादा कोई लेता नहीं
अगर आयें तो कहना अब उनसे ऐ ज़माने तुम्ही
आज उनके तस्सवुर में बइठे यहाँ हम ही नहीं
यह कह कर दिल-ऐ-बर्बाद को मिलता चैन कहीं
उनसे खफा होकर तो मिलती मुझे सांसें नहीं
हैफ! किससे कहें हम दिल-इ-तमन्ना या रब,
आज यहाँ हम मरतें हैं और उन्हें फिक्र्र नहीं
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