Saturday, April 18, 2015

विराना

है सदा साथ तू ही बनके अब हमनवां मेरा
कहीं तुझे मेरे गुनाहों की सज़ा न मिल जाए

या इलाही बात करता हूँ हर पल यूँ ही तुझसे
इक फ़रियाद है, हमसफ़र हमज़ुबाँ हो जाए

साथ रहता यह हमसफ़र बनके हमदम मेरा
पर देख और को न जाने यह कहाँ ग़ुम जाए

सुनता रहता है यह हर कही-अनकही बातें
ज़वाब माँगूँ तो देखकर बस मुस्कुराता जाए

है किसी का ऐसा हमसफ़र जैसे मेरा विराना
जब सब साथ छोड़ दें हैं तो यह साथ हो जाए

एक मैं ही हूँ जो निभाता है तेरे साथ वरना
वो कौन है जिसका तेरे साथ बसर हो जाए

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